बाल मजदूरी पर निबंध – Child Labour Essay in Hindi

हमारे भारत में बाल श्रम एक विकट समस्या है इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने बहुत से कदम उठाये हैं और कानून बनाये है लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से जो लोग बाल मजदूरी करवाते हैं वह कानून का उल्लंघन करके बच्चों से मजदूरी आसानी से करवाते रहते हैं क्योंकि उन्हे मालूम है की हम बच्चों से कम रुपये में ज्यादा काम करवा सकते हैं और उनको डाट भी सकते हैं उनकी पिताइ भी कर सकते हैं उनसे ज्यादा काम करवा सकते हैं यहाँ तक की कभी- कभी तो उन बच्चों से एक- दो घंटे ज्यादा काम भी ले लिया जाता है और वह बच्चे मजबूरी की माना नहीं कर पाते और जो बच्चों से बाल मजदूरी करवाते हैं उन्हे कानून का डर

 नहीं रहता क्योंकि वह जानते हैं की हमारे भारत में भ्रष्टाचार फैला हुआ है तो हम कुछ रुपए देकर छूट जाएँगे और फिर से वही बच्चों से काम कर सकते हैं

बाल श्रम के प्रमुख कारण

गरीबी:- हमारे भारत देश में अत्यंत गरीबी के कारण बाल मजदूरी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है हमारे गाँव मै गरीबी के कारण जीवन बहुत जटिल होता जा रहा है जिससे कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण बाल श्रम को प्रोत्साहन मिलता है जो परिवार बहुत अधिक गरीब होते हैं वह अपने बच्चों को मजदूरी पर लगा देते हैं जिसके कारण उनका शोषण होता है जिस जगह वे मजदूरी करते हैं वह या तो ढाबा या कारखाना होता है जहां बच्चों से क्षमता से अधिक काम लिया जाता है और वह बच्चे क्षमता से अधिक काम करने के लिए मजबूर रहते हैं इस प्रकार उनका गरीबी के कारण शोषण होता रहता है

शिक्षा की कमी:-ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों के माता पिता कम पढ़े लिखे होने के कारण वह अपने बच्चों को भी स्कूल नहीं भेजते और वह सोचते हैं की पढ़ लिखकर क्या करेंगे इससे तो अच्छा है की इनको मजदूरी पर लगा दिया जाए इससे कुछ रुपए कमा कर लाएँगे जिससे हमारी गरीबी दूर होगी अगर लड़का है तो कारखानों में या ढाबो पर लगा देते हैं लड़कियाँ हैं तो किसी के घर पर मजदूरी करने के लिए भेज देते हैं तो यह कहना उचित है की अगर बच्चों के माता पिता शिक्षित हैं तो वह अपने बच्चों से मजदूरी नहीं कराएंगे

बाल मजदूरी के दुष्परिणाम

जब हम बच्चे होते हैं तो हमें किसी बात की चिंता नहीं रहती हम खूब मस्ती करते हैं खूब खेलते हैं अच्छे- अच्छे नए- नए खिलौने लेकर आते हैं सब हमें बहुत प्यार करते हैं हम जो भी चाहे वह कर सकते हैं किसी बात की चिंता नहीं रहती जीवन में यह सबसे अच्छा पल रहता है जिसे हम बचपन कहते हैं लेकिन बाल मजदूरी के कारण बच्चों का वह बचपन कहीं खो जाता है वह ना खेल पाते न मनचाहा काम कर पाते न मस्ती कर पाते ना पढ़ लिख पाते उनका पूरा बचपन मजदूरी में ही चला जाता है

मजदूरी करने वाले बच्चे अक्सर कुपोषण का शिकार हो जाते है क्योंकि जो बच्चे मजदूरी करते हैं उन्हे ना तो अच्छा खाना मिल पता और ना ही उनके रहने की जगह अच्छी होती है जहां वह काम करते हैं उन कारखानों में से निकलने वाला धुआँ उनके फेफड़ों को खराब कर देता है और उन्हे कई तरह की बीमारियाँ लग जाती हैं

मजदूरी करते समय बच्चों से अक्सर गलतियाँ हो जाती हैं गलतियाँ तो बड़े- बड़े लोगों से भी हो जाती हैं लेकिन बड़े लोगों को डाँटना आसान नहीं रहता बच्चों को डाटना आसान होता है इसलिए बहुत से लोग बड़ों की वजह बच्चों से काम कराना पसंद करते है लेकिन डाटने से बच्चे के मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव पड़ता है

मजदूरी करते समय कई बच्ची और बच्चियों का शारीरिक शोषण भी किया जाता है जो उनके ऊपर दोहरी मार होती है एक रिपोर्ट के अनुसार मजदूरी करने वाले बच्चों में से लगभग 40% बच्चों का शारीरिक शोषण किया गया यह बहुत ही गंभीर समस्या है लेकिन इस पर कभी भी ध्यान नहीं दिया गया यह एक अपने आप में बहुत बड़ी शर्मिंदगी महसूस होती है

बहुत से बच्चों को तो मजबूरी में मजदूरी करनी पड़ती है क्योंकि उनके माता पिता अनपढ़ होने के कारण वह पढाई का महत्त्व नहीं समझते और वह अपने बच्चों को मजदूरी पर लगा देते हैं और उनको मजबूरी में मजदूरी करनी पड़ती है और उनका सारा जीवन मजदूरी करने में ही व्यतीत हो जाता है इसलिए इसलिए यह कहना बिल्कुल उचित है की जिस बच्चों के माता पिता पढ़े लिखे होंगे वह अपने बच्चों के भविष्य का अधिक ध्यान रख पाएँगे और उनको अच्छे शिक्षित करेंगे तभी बाल मजदूरी जो दिन पर दिन बढ़ती जा रही है कम होगी ज्यादातर जो बच्चे गरीब होते हैं वह पढ़ लिख नहीं पाते इस कारण उन्हे अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती क्योंकि वह अच्छे ज्यादा पढ़े लिखे होंगे जब भी उन्हें अच्छी नौकरी मिलेगी और वह देश के विकास में सहयोग कर पाएँगे इसीलिए कहा जाता है की आज के बच्चे कल का भविष्य है

जहां बच्चे कम करते हैं वहा के लोग लोगों का रहन सहन अच्छा नहीं होता उनकी भाषा अभद्र होती है जिसके कारण बच्चों की मानसिक स्थिति पर उनका बहुत प्रभाव पड़ता है और वह वैसा ही अभद्र व्यवहार करने लगते है हमारे देश के बच्चे अशिक्षित रह जाते हैं तो हमारे देश में बेरोजगारी गरीबी भुखमरी अधिक बढ़ाने लगेगी और देश का आने वाला कल अंधकार में चला जाएगा

बाल मजदूरी रोकने के उपाय

सरकार ने कई कानून बनाए हैं लेकिन जब तक हम सभी उन कानून का सही ढंग से पालन नहीं करेंगे तब तक देश को बाल से पुरी तने मुक्त नहीं कर पाएँगे क्योंकि हमारे देश में भ्रष्ट चार पुरी चरम सीमा पर बढ़ गया है क्योंकि जो लोग बच्चों से मजदूरी करते हैं वह बिल्कुल कानून से नहीं डरते क्योंकि वह जानते हैं की देश में भ्रष्टाचारी बहुत है रिश्वतखोरी बहुत है इसलिए वह बच्चों से कम करते रहती हैं और जब पकड़े जाते हैं तो रिश्वत देकर छूट जाते हैं सबसे महत्वपूर्ण बात है की कानून तो बन जाते हैं लेकिन उसका कड़ाई से पालन नहीं होता है

हमारे देश में बाल श्रम के अंतर्गत कई तरह के कानून बनाए गए उनमें से एक एक्ट 1986 में बनाया गया जिसका नाम है चाइल्ड लेबर एक्ट जिसके तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे से कार्य करवाना दंडनीय अपराध माना जाएगा देखभाल और संरक्षण के तहत एक एक्ट बना गया है 2000 में इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति बच्चों से मजदूरी करवाता है या फिर उन्हे ऐसा करने के लिए मजबूर करता है वह चाहे उसकी माता पिता ही क्यों ना हो उसे पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी 2009 में भी एक कानून बनाया गया जिसके अंतर्गत 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी तथा प्राइवेट स्कूलों में भी गरीब और विकलांग बच्चों के लिए 25 परसेंट सीटें आरक्षित रहेंगी

सरकार की साथ- साथ हम सभी को यह धर्म संकल्प करना आवश्यक है की हम अपने कारखानों में या अपने घरों में कहीं पर भी बच्चों से मजदूरी या कम नहीं कराएंगे या बच्चों की बनी हुई चीजों का उपयोग नहीं करेंगे तब तक हमारे देश से बाल मजदूरी कम नहीं होगी

उपसंहार

हमें बाल श्रम के खिलाफ आवाज़ उठानी ही पड़ेगी नहीं तो बाल मजदूरी बढ़ती ही जाएगी जहां पर भी कोई बच्चा हमें बाल मजदूरी करते हुए मिले उसकी शिकायत हमें नजदीकी पुलिस सिस्टम में करनी चाहिए क्योंकि जब तक यह बाल श्रम करवाने वाले व्यक्ति पकड़े नहीं जाएंगे जब तक बार मजदूरी बढ़ती ही जाएगी तो हमारा यह कर्तव्य है की हम ऐसे लोगों को समझाएं की बच्चों से मजदूरी करवाना एक दंडनीय अपराध है इसलिए बच्चों से मजदूरी नहीं करना चाहिए

हमारे देश में बाद मजदूर एक गंभीर समस्या बनी बनी हुई है जल्द ही इसे खत्म नहीं किया गया तो यह हमारे देश के विकास में बाधक सिद्ध होगी बाल श्रम के खिलाफ हमें आवाज़ उठानी होगी क्योंकि बाल श्रम खत्म करना केवल सरकार का ही कर्तव्य नहीं है हमारा भी कर्तव्य है जब तक बाल श्रम खत्म नहीं होगा हमारे देश के बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा और हमारे देश के बच्चों को भविष्य सुरक्षित नहीं यानि हमारे देश का भविष्य सुरक्षित नहीं है बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं या उनका ही बचपन अँधेरे में बीतेगा तो हम शुद्र भारत की कल्पना कैसे कर सकते हैं अगर हमें अपने भारत देश की आर्थिक स्थिति सुद्रण करनी है तो हमें अपने देश से बाल मजदूरी मिटाने ही होंगे क्योंकि हमारे देश के लिए एक गंभीर समस्या है अगर जल्द ही इसको खत्म नहीं किया गया तो यह हमारे देश को दीमक की तरह खोखला कर देगी इसलिए हमें यह धन संकल्प करना है की हमारे देश से हम बाल मजदूरी को जड़ से उखाड़ कर फेंक देंगे और यह हमारे देश के लिए और हमारे देश के बच्चों के लिए बहुत ही आवश्यक है

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