नाग पंचमी: नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन के लिए महाकाल मंदिर परिसर में नया ब्रिज तैयार

सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है. इस दिन नाग देवता और भगवान शंकर की पूजा की जाती है.

विश्व में एक मात्र नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन कराने के लिए महाकाल मंदिर में तेजी से कार्य चल रहा है। इस दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन वर्ष में एक बार नागपंचमी पर ही हो सकते है।

नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन अब दूर नही है। 2 अगस्त को नागपंचमी के पहले ही दर्शन के लिए जाने वाले सेतु का निर्माण पूर्ण हो गया है। नए ब्रिज से सुगमता से दर्शन करेंगे श्रद्धालु।

लगभग एक करोड़ की लागत से दो माह में तैयार नए फुटओवर ब्रिज से होकर श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने जाएंगे और दर्शन के बाद इसी ब्रिज से वापस लौटेंगे। नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए सोमवार रात 10 बजे के बाद से ही दर्शनार्थियों की लंबी-लंबी कतारें लगने लगेंगी। संभवत: 4 या 5 नंबर गेट से सभी को प्रवेश दिया जाएगा। वहीं वीवीआईपी की इंट्री भी इसी मार्ग से रहेगी।

विश्व प्रसिद्ध ज्योर्तिलिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर तीसरी मंजिल पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन 1 अगस्त की रात 12 बजे बाद से आम जनता कर सकेगी। प्राप्त जानकारी अनुसार ये ब्रिज लगभग 1 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है। समय-समय पर इसे खोला और जोड़ा जा सकता है।

नागपंचमी पर भक्तों को भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कराने के लिए पहली बार फुट ओवर ब्रिज का निर्माण श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा से जुड़े महाकाल भक्त द्वारा किया गया है।

मंदिर परिसर में बनकर तैयार यह ब्रिज काफी मजबूत बनाया गया है। इसकी लंबाई २७ मीटर ४२२ एमएम (लगभग ९१ फीट), 10 फीट चौड़ाई है। इसमें 5 फीट आने व ५ फीट जाने का मार्ग दो हिस्सों में बांट दिया है। इसका भार मंदिर के शिखर पर नहीं होने से शिखर पूर्णत: सुरक्षित है। ब्रिज के बैसमेंट में पांच बड़े खंभे लगाए हैं। फाउंडेशन की गहराई 10 फीट रखी है।

मंदिर के विश्राम धाम से नागचंद्रेश्वर मंदिर तक 91 फीट लंबा ब्रिज पांच पिलर पर बनकर तैयार हो चूका है। ब्रिज निर्माण के पहले मंदिर समिति द्वारा अस्थाई लोहे की सीढिय़ों का उपयोग करती थी। यह सीढ़ी मुख्य मंदिर परिसर से सटी होती थी। लोहे की सीढिय़ों से मंदिर के स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंच रहा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने मंदिर स्ट्रक्चर की मजबूती को बनाए रखने तथा भक्तों को सुविधा पूर्वक दर्शन कराने के लिए फुट ओवर ब्रिज का निर्माण कराने का सुझाव एएसआई ने दिया था। इसके बाद समिति ने फोल्डिंग फुट ओवर ब्रिज निर्माण का निर्णय लिया है।

बाबा महाकाल की सावन-भादौ मास में निकलने वाली सवारियों के क्रम में तीसरी सवारी 1 अगस्त को निकाली जाएगी। दूसरे ही दिन 2 अगस्त को नागपंचमी का पर्व है। इसलिए श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक रहने की संभावना है।

महाकाल मंदिर के शिखर से जोड़कर बन रहे ब्रिज का कार्य देखने के लिए प्रतिदिन मंदिर के अधिकारी पहुंच रहे है। गुरूवार को अखाड़ा महंत विनित गिरी महाराज, सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने ब्रिज पर चल रहे कार्य को देख कर संतोष जताया।

पिछले दो सावन के सोमवार को शहर में जिस तरह से भीड़ बढ़ी, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है, कि इस तीसरे सोमवार को भी भीड़ का दबाव अधिक रहेगा। इसलिए मंदिर परिसर में कार्तिकेय मंडपम तक जाने वाले रास्ते के बैरिकेड्स को पीछे की ओर खिसकाया गया, ताकि जगह अधिक निकल आए। वहीं मंदिर आने के प्रमुख मार्गों पर शुक्रवार से ही चौकसी और बढ़ा दी गई है।

वहीं नागचंद्रेश्वर मंदिर में भी रंगाई-पुताई और सफाई का काम शुरू हो गया है। वैसे तो अखाड़ा की ओर से इस मंदिर में पूजन कार्य किया जाता है, लेकिन आम दर्शनार्थियों के लिए वर्ष में एक बार ही खोला जाता है।

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